बगहा से नरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट….
बगहा के रामनगर के बहुचर्चित विजय सहनी हत्याकांड में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए पांच आरोपितों महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला रामनगर थाना कांड संख्या 189/2022 से जुड़ा है। घटना 1 मई 2022 की है। मृतक विजय सहनी की पत्नी आशा देवी के आवेदन पर 4 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन के अनुसार, विजय सहनी को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने फोन कर बुलाया गया था। इसके बाद वह बाइक से घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने काफी तलाश के बाद पुलिस को सूचना दी।

घटना के करीब सात दिन बाद आरोपित महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल में एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया गया। शव की पहचान मृतक की अंगूठी और घड़ी के आधार पर की गई। पुलिस ने अनुसंधान पूरा करने के बाद आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में 10 गवाहों को पेश किया। इनमें मृतक की पत्नी आशा देवी, पुत्र राहुल कुमार सहनी, चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख रहे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, कॉल डिटेल, बरामद मोबाइल और बाइक समेत कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए गए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, संपत्ति लालच में बहन गीता देवी ने भाई विजय सहनी की हत्या की साजिश रची थी, जिसमें उसकी बहन अन्य आरोपितों की भूमिका सामने आई। लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने अदालत के फैसले की जानकारी दी।
इस फैसले को चर्चित हत्याकांड में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, भाई-बहन के रिश्ते और संपत्ति विवाद से जुड़े अपराधों को लेकर भी यह फैसला कड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।
लोक अभियोजक जितेन्द्र भारती ने बताया कि मामले के मुख्य आरोपी अशोक यादव को भी अदालत ने दोषी करार दिया है,जिसकी सजा 11 सितंबर को सुनाई जाएगी।
