नरेंद्र पांडेय ब्यूरो रिपोर्ट बगहा बिहार…
..पितृपक्ष के समापन पर हजारों साधु-संतों का चरण पूजन, वस्त्र-दक्षिणा और मधुर भोजन से किया सम्मान
..गोपालगंज के भजन सम्राट विजेंद्र गिरि ने भजनों से बांधा समां, जयकारों से गूंजा प्रतापपुर गांव.
बगहा
बगहा में रिश्तों के प्रति समर्पण, पूर्वजों के सम्मान और सनातन परंपराओं के निर्वहन की अनूठी मिसाल बगहा-2 प्रखंड के सेमरा थाना क्षेत्र अंतर्गत प्रतापपुर गांव में देखने को मिली।

यहां बालक दास बाबा ने अपने स्वर्गीय पिता सत्यनारायण तिवारी तथा छोटे भाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनकी प्रतिमाओं की स्थापना कराई। इस अवसर पर पितृपक्ष के समापन और पिता की पुण्यतिथि के मौके पर हजारों साधु-संतों एवं महात्माओं का श्रद्धापूर्वक सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान साधु-संतों का चरण पूजन किया गया। इसके साथ ही उन्हें मधुर भोजन, वस्त्र, दक्षिणा तथा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन में सनातन धर्म की परंपराओं, पितरों के प्रति श्रद्धा और संत सेवा के भाव को विशेष महत्व दिया गया। बड़ी संख्या में साधु-संतों की उपस्थिति से प्रतापपुर गांव का वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय बना रहा।

….काशी के कलाकारों ने प्रतिमाओं को दिया अंतिम रूप
बालक दास बाबा ने अपने पिता स्व .सत्यनारायण तिवारी जी और छोटे भाई स्व.अरविंद तिवारी जी की यादों को संजोने के उद्देश्य से प्रतिमाओं की स्थापना कराई। इन प्रतिमाओं को काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी के कलाकारों ने अंतिम रूप दिया। इस पहल के माध्यम से उन्होंने अपने परिजनों के प्रति प्रेम, श्रद्धा और सम्मान को स्थायी स्मृति के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया।
… भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ माहौल.

बताया जाता है कि बालक दास बाबा के पिता स्वर्गीय सत्यनारायण तिवारी अपने जीवनकाल में संकीर्तन और भजन के विशेष अनुरागी थे। उनकी इसी रुचि को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। गोपालगंज के प्रसिद्ध भजन गायक विजेंद्र गिरि ने अपनी प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उनके भजनों पर उपस्थित लोगों ने जयकारे लगाए और भक्तिमय माहौल का आनंद लिया।
….. पितरों की स्मृति और संत सेवा का संदेश

इस आयोजन के माध्यम से बालक दास बाबा ने अपने दिवंगत पिता और छोटे भाई के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही साधु-संतों की सेवा और सम्मान की परंपरा को भी आगे बढ़ाया। कार्यक्रम में श्रद्धा, भक्ति, पारिवारिक संस्कार और सनातन परंपराओं का संगम देखने को मिला।
प्रतापपुर गांव में आयोजित यह कार्यक्रम परिजनों की स्मृति को सम्मान देने और संत सेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण बना।
