ब्यूरो रिपोर्ट: नरेंद्र पांडेय प.चंपारण बगहा बिहार……………….………………..
बिहार के सहरसा सदर अस्पताल में चिकित्सक-पत्रकार विवाद के बाद दो चिकित्सकों के निलंबन के विरोध में तथा प.चंपारण के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर दिवाकर पांडेय को अज्ञात लोगों द्वारा बेरहमी से जान लेवा हमला करने के बाद भी आज तक पुलिस के द्वारा किसी की गिरफ्तारी नहीं किया जा सका है। घटना 21 अगस्त की है जो महीने भर में भी इसकी कोई सुराग नहीं चल सका। इस दौरान गुरुवार को बगहा अनुमंडलीय अस्पताल की ओपीडी सेवा बंद रही।

बिहार हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (भाषा) के आह्वान पर चिकित्सकों ने एक दिवसीय ओपीडी बहिष्कार किया। हालांकि इमरजेंसी व गंभीर मरीजों की उपचार व्यवस्था जारी रही।
भाषा के प्रमंडलीय अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने कहा कि सरकार ने बिना निष्पक्ष जांच के दो चिकित्सकों को निलंबित किया है, जो एकपक्षीय कार्रवाई है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि जांच नहीं होने पर आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। वहीं डॉ. तारिक नदीम व डॉ. चंदन कुमार ने बताया कि हड़ताल केवल ओपीडी तक सीमित रही है। गंभीर मरीजों को आईपीडी और इमरजेंसी में भर्ती कर चिकित्सकों के द्वारा इलाज किया गया, ताकि किसी भी मरीज को परेशानी नहीं हो।

ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे महबूब आलम, मो. इसराफिल, अहमद अंसारी, कमला देवी और प्रसून कुमार ने बताया कि उन्हें अस्पताल की बंदी की पूर्व जानकारी नहीं थी। अस्पताल सूत्रों के अनुसार दिनभर में करीब तीन दर्जन से अधिक सामान्य मरीज बिना ओपीडी उपचार के वापस लौट गए।
