वाल्मीकिनगर से नरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट…
.बीच सड़क पर देर तक करते रहे विचरण
वाल्मीकिनगर: वाल्मीकिनगर में सोमवार की सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो जंगली भालू अतिथि भवन मुख्य सड़क पर बेखौफ घूमते नजर आए। सड़क पर अचानक भालुओं के दिखाई देने से राहगीरों में दहशत फैल गई और वाहनों के पहिए थम गए। देखते ही देखते आसपास के लोग कौतूहलवश मौके पर जुटने लगे। काफी देर तक भालू सड़क पर डटे रहे, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। बाद में लोगों ने एकजुट होकर शोर मचाया, तब दोनों भालू सड़क पार कर वापस जंगल की ओर लौट गए। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली और सड़क पर आवाजाही सामान्य हो सकी।
वाल्मीकिनगर में जंगली जानवरों का आबादी वाले क्षेत्रों में आना कोई नई बात नहीं है। यहां पहले भी कई बार तेंदुए मुख्य सड़कों पर घूमते देखे जा चुके हैं, जबकि भालुओं की आवाजाही भी अक्सर होती रहती है। वाल्मीकिनगर के समीप ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) का घना वन क्षेत्र शुरू हो जाता है। इसी कारण भोजन और पानी की तलाश में वन्यजीव समय-समय पर मानव बस्तियों और मुख्य मार्गों तक पहुंच जाते हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह सड़क पर भालुओं को देखते ही लोग सुरक्षित दूरी बनाकर खड़े हो गए। कई राहगीरों ने काफी देर तक उनके हटने का इंतजार किया। हालांकि किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
प्रकृति प्रेमी मनोज कुमार ने बताया कि इन दिनों वीटीआर में मानसून के कारण जंगल सफारी बंद है।

सफारी बंद होने से वन क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां काफी कम हो गई हैं और जंगल का वातावरण पहले की अपेक्षा अधिक शांत हो गया है। ऐसे माहौल में वन्यजीव स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करते हुए खुले क्षेत्रों तक निकल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोजन और पानी की तलाश में भालू, बाघ, तेंदुआ, चीतल, हिरण समेत कई वन्यजीव जंगल से निकलकर मुख्य मार्गों और आसपास की बस्तियों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और किसी भी वन्यजीव के पास जाने या उसे उकसाने से बचना चाहिए।
गौरतलब है कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व भालुओं के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास माना जाता है। यहां घने जंगल, मधुमक्खियों के छत्ते, प्राकृतिक जलस्रोत तथा पर्याप्त वन क्षेत्र उपलब्ध हैं। हालांकि गर्मी के मौसम में जंगलों में प्राकृतिक फल-फूल और भोजन की कमी होने पर वन्यजीव अक्सर आबादी वाले इलाकों का रुख कर लेते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ अभिषेक का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में लोगों को संयम बरतते हुए वन विभाग को तत्काल सूचना देनी चाहिए, ताकि मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
