वाल्मीकिनगर से नरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट..
*रवि प्रकाश उप मुखिया वाल्मीकिनगर ने खोला मोर्चा*
*श्रावण में श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें, दो किलोमीटर अतिरिक्त तय कर संगम तट से भरना पड़ता है जल*
वाल्मीकिनगर……
आस्था के पवित्र पर्व श्रावण मास में जहां शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, वहीं वाल्मीकिनगर स्थित गंडक नदी के संगम तट पर विराजमान बाबा कौलेश्वर के दरबार तक जाने वाला मुख्य रास्ता पिछले दो वर्षों से ताले में बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि बड़ी संख्या में शिवभक्तों को मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जबकि कई श्रद्धालु निराश होकर बिना दर्शन किए ही लौटने को विवश हो रहे हैं।
गंडक नदी के किनारे श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्मित पाथवे सीधे कौलेश्वर मंदिर और जटाशंकर धाम तक पहुंचने का सबसे सुगम मार्ग माना जाता है। लेकिन जल संसाधन विभाग द्वारा इस पाथवे के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगाए जाने के कारण श्रद्धालुओं का आवागमन बाधित हो गया है। हालांकि मंदिर तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है, लेकिन वह काफी लंबा और असुविधाजनक है। विशेषकर कांवड़ियों और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को इससे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पाथवे का मुख्य गेट हाल-फिलहाल में नहीं, बल्कि लगभग दो वर्ष पूर्व बंद किया गया था। तब से लगातार श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। श्रावण मास में जब प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिवभक्त गंडक नदी के संगम तट से जल भरकर बाबा कौलेश्वर और जटाशंकर धाम में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं, तब यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
इसी जनसमस्या को देखते हुए वाल्मीकिनगर पंचायत के उप मुखिया रवि प्रकाश ने पहल करते हुए जल संसाधन विभाग की अधीक्षण अभियंता से श्रावण मास के दौरान कम-से-कम एक महीने के लिए पाथवे का मुख्य गेट खोलने की मांग की है।

उनका कहना है कि आस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए विभाग को इस अवधि में दोपहिया एवं ई रिक्शा वाहन को आवागमन की अनुमति देनी चाहिए, ताकि भक्तों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। वही ई रिक्शा चालकों को रोजगार उपलब्ध हो सके।
उधर, स्थानीय नागरिकों और शिवभक्तों ने भी प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग से अविलंब मुख्य गेट का ताला खोलने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि श्रावण मास में पाथवे को खोल दिया जाए तो हजारों श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी और संगम तट से जल भरकर बाबा कौलेश्वर के दरबार तक पहुंचना पहले की तरह सुगम हो सकेगा। अब श्रद्धालुओं की निगाहें विभागीय निर्णय पर टिकी हैं कि उनकी आस्था और सुविधा को देखते हुए कब तक इस ताले को खोला जाता है।
