कुछ यात्राएँ केवल दूरी तय करने के लिए नहीं होतीं, बल्कि वे रिश्तों को मजबूत करती हैं, विचारों को नई दिशा देती हैं और जीवनभर के लिए प्रेरणा छोड़ जाती हैं। बेतिया से बगहा तक की मेरी यह यात्रा भी ऐसी ही एक यादगार यात्रा रही। यह केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर नहीं था, बल्कि पत्रकारों की एकता, उनके अधिकारों और पत्रकारिता के मूल स्वरूप पर गंभीर मंथन का भी अवसर था।
जब ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन का गठन बेतिया में हो रहा था, तब आदरणीय डॉ. अरविंद नाथ तिवारी जी के आमंत्रण पर मुझे वहाँ उपस्थित होने का अवसर मिला। उन्होंने मुझ पर विश्वास व्यक्त करते हुए पहले जिला महामंत्री का दायित्व सौंपा।

बाद में जब बिहार प्रदेश इकाई का गठन हुआ तो उन्होंने मुझे प्रदेश महासचिव का उत्तरदायित्व दिया। यह मेरे लिए केवल संगठन का एक पद नहीं था, बल्कि पत्रकारों की आवाज़ को संगठित करने और उनके सम्मान व अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी थी।

इसी आत्मीय विश्वास के कारण उन्होंने पुनः बगहा आने का आमंत्रण दिया। मौसम अनुकूल नहीं था, लेकिन जब उद्देश्य पत्रकारों के बीच संवाद स्थापित करना और संगठन को मजबूत करना हो, तब कठिन रास्ते भी आसान लगने लगते हैं। इसलिए बिना किसी हिचकिचाहट के मैं बगहा पहुँचा।
बस से उतरते ही जिस आत्मीयता का अनुभव हुआ, वह जीवनभर स्मरणीय रहेगा। जैसे ही पत्रकार साथी नरेंद्र पांडे जी को मेरे बगहा पहुँचने की सूचना मिली, वे तत्काल अपनी बाइक लेकर बस स्टैंड पहुँच गए। उनके स्नेह, अपनत्व और आत्मीय व्यवहार ने मन को भावुक कर दिया।
मैं व्यक्तिगत रूप से नरेंद्र पांडे जी को बगहा के पत्रकारों का “हनुमान” मानता हूँ। जिस प्रकार हनुमान जी समर्पण, निष्ठा, सेवा और संकट में साथ निभाने के प्रतीक हैं, उसी प्रकार नरेंद्र जी भी संगठन और पत्रकार साथियों के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। ऐसे कर्मठ और निस्वार्थ साथी किसी भी संगठन की वास्तविक पूँजी होते हैं। वहीं ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन बिहार प्रदेश इकाई बगहा में इसकी बैठक आहूत हुई थी। जिसमें अध्यक्षता प्रभात खबर बगहा प्रभारी इजरायल अंसारी जी ने किया जबकि मंच संचालन हिदुस्तान अखबार के बगहा प्रभारी चंद्रभूषण शांडिल्य जी ने अपने मृदुल मधुर भाषाओं से संबोधित दिल को छू कर अंतरात्मा को कुछ देर के लिए बरबस समझने बूझने के लिए बेबस कर देता था।
इस अवसर पर फोटो पत्रकार सुजय प्रकाश पांडेय जी की सक्रिय उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। उनकी सादगी, सहजता और कार्य के प्रति समर्पण ने पूरे कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान आदरणीय डॉ. अरविंद नाथ तिवारी जी ने मुझे मंच प्रदान किया और पूरे विश्वास के साथ अपने विचार रखने की स्वतंत्रता दी। लगभग आधे घंटे तक मैंने पत्रकार साथियों से खुलकर संवाद किया। मेरा उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं था, बल्कि उन पत्रकारों के भीतर संगठन की शक्ति, आत्मसम्मान और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता की नई चेतना जगाना था।
इसी कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण पत्रकार संघ के संरक्षक एवं बगहा के प्रख्यात समाजसेवी, “बगहा के लोगों की आवाज़” के रूप में विख्यात आदरणीय दिनेश अग्रवाल जी ने मंच पर मुझे माला पहनाकर सम्मानित किया। उनका यह सम्मान मेरे लिए केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं था, बल्कि पत्रकारिता के प्रति मेरी प्रतिबद्धता और संगठन के प्रति किए जा रहे कार्यों का सम्मान था। मैं उनके इस आत्मीय स्नेह, विश्वास और सम्मान के लिए हृदय की गहराइयों से उनका आभार व्यक्त करता हूँ। ऐसे वरिष्ठ समाजसेवियों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन हम जैसे पत्रकारों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
मैंने अपने संबोधन में कहा कि विडंबना यह है कि जो पत्रकार प्रतिदिन समाज को जागरूक करने का कार्य करते हैं, उन्हें स्वयं भी अपने अधिकारों और अपने साथ हो रहे शोषण के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। जब तक पत्रकार संगठित नहीं होंगे, तब तक उनका आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक शोषण विभिन्न रूपों में जारी रहेगा। इसलिए व्यक्तिगत मतभेदों और अहंकार को पीछे छोड़कर संगठन को सर्वोपरि रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम की समाप्ति के बाद हम सभी आदरणीय डॉ. अरविंद नाथ तिवारी जी के आवास पहुँचे, जहाँ संगठन के विस्तार, आगामी योजनाओं और पत्रकार हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
डॉ. तिवारी जी का जीवन स्वयं संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। कुछ वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लंबे उपचार के बाद उनका स्वास्थ्य सामान्य हुआ, लेकिन उन्होंने विश्राम को अपना लक्ष्य नहीं बनाया। आज भी वे पूरे उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ पत्रकारों के हित, संगठन की मजबूती और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर सक्रिय हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो परिस्थितियाँ कभी भी व्यक्ति को उसके कर्तव्य से विमुख नहीं कर सकतीं।
इस यात्रा के दौरान बगहा के वरिष्ठ पत्रकार माधवेंद्र पांडे जी का उल्लेख करना भी आवश्यक है। उनकी निर्भीक, निष्पक्ष और जनपक्षधर पत्रकारिता उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाती है। जनहित के मुद्दों को पूरी ईमानदारी और बेबाकी से उठाना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे पत्रकार लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति हैं और समाज के लिए प्रेरणा भी।
यह यात्रा एक बार फिर इस विश्वास को मजबूत करती है कि पत्रकारिता केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा और राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र मिशन है। यदि पत्रकार अपने दायित्वों के साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति भी सजग रहें, संगठन को सर्वोपरि रखें, आपसी मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे का हाथ थामें, तो कोई भी शक्ति उनकी गरिमा और आवाज़ को कमजोर नहीं कर सकती।
अंत में मैं आदरणीय डॉ. अरविंद नाथ तिवारी जी, संरक्षक आदरणीय दिनेश अग्रवाल जी, नरेंद्र पांडे जी, सुजय प्रकाश पांडेय जी, माधवेंद्र पांडे जी तथा बगहा के समस्त पत्रकार साथियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। आप सभी का स्नेह, सम्मान और आत्मीय सहयोग इस यात्रा को मेरे जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों में शामिल कर गया।
आइए, हम सब यह संकल्प लें कि संगठन को व्यक्ति से ऊपर रखेंगे, पत्रकारिता को स्वार्थ से ऊपर रखेंगे और सत्य, समाज तथा राष्ट्रहित को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखेंगे।
“संगठन ही शक्ति है, एकता ही सम्मान है और समर्पित पत्रकारिता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।” इस ऐतिहासिक पल के धरोहर अब्बू साबिर जी, निर्भय कुमार पंचानन सिंह सूरज सिंह प्रकाश सिंह संजय पांडेय शमशाद अंसारी विवेक सिंह विवेक पांडेय महेश अग्रवाल जितेंद्र कुमार राधेश्याम त्रिपाठी संजीव तिवारी राजेश कुमार बैठा अन्य साथियों का नाम नहीं मालूम सभी ने यादगार पल बनाने में अपनी जिम्मेदारी के साथ अहम भूमिका निभाई जिनको मैं कोटि कोटि नमन एवं शुभकामना के साथ धन्यवाद देता हूं।
