बगहा से नरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट…

सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते एक बुजुर्ग की उम्मीद लगभग टूट चुकी थी। हर बार यही आस होती कि शायद आज काम हो जाएगा, लेकिन महीनों बीतते गए और दाखिल-खारिज का मामला लंबित ही रहा। आखिरकार जब यह मामला बगहा-2 के राजस्व पदाधिकारी रवि प्रकाश चौधरी तक पहुंचा, तो उन्होंने इसे महज एक फाइल नहीं, बल्कि एक जरूरतमंद बुजुर्ग की परेशानी समझा।

रवि प्रकाश चौधरी ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। सभी दस्तावेजों और अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई और बिना अनावश्यक देरी के दाखिल-खारिज का निष्पादन सुनिश्चित कराया। जैसे ही बुजुर्ग को यह जानकारी मिली कि उनका वर्षों से अटका काम पूरा हो गया है, उनके चेहरे पर राहत की मुस्कान लौट आई।

लोगों का कहना है कि रवि प्रकाश चौधरी की कार्यशैली सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय भी है। उनकी दरियादिली और संवेदनशीलता ने यह भरोसा दिलाया कि यदि अधिकारी चाहें, तो एक परेशान व्यक्ति की लंबी पीड़ा भी खत्म हो सकती है। यही वजह है कि इस पहल की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।
इस मौके पर राजस्व पदाधिकारी रवि प्रकाश चौधरी ने बुजुर्ग को समझाया कि सरकारी काम के लिए किसी भी दलाल या बिचौलिये को पैसे देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन नीति के तहत हर पात्र व्यक्ति का काम पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार किया जाता है।
उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि यदि कोई सरकारी काम के नाम पर पैसे मांगे, तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। उनका कहना था कि आम नागरिकों का विश्वास बनाए रखना ही प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

यह सिर्फ एक दाखिल-खारिज का मामला नहीं, बल्कि उस भरोसे की वापसी की कहानी है, जो महीनों की परेशानी के बीच कहीं खो गया था। और जब एक संवेदनशील अधिकारी उस भरोसे को वापस लौटा दे, तो सरकारी दफ्तर भी लोगों के लिए उम्मीद की जगह बन जाते हैं।
