ब्यूरो रिपोर्ट: नरेंद्र पांडेय बगहा प. चंपारण बिहार…
बगहा/पश्चिम चंपारण। गंडक नदी में आई बाढ़ ने दियारा और तटवर्ती क्षेत्रों के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। लगातार बढ़ते जलस्तर और खेतों में कई दिनों से जमा पानी के कारण हजारों एकड़ में लगी धान की फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। फसल बर्बाद होने से किसानों के बीच मायूसी छा गई है और उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
इस दौरान मधुबनी प्रखंड के प्रमुख विजया सिंह,चीउरही मुखिया विजय यादव, बगहा 1 प्रखंड चंद्रपुर रतवल पंचायत के मुखिया नितेश राव, सिंगाड़ी पिपरिया के मुखिया प्रतिनिधि सह राजद एमएलसी प्रतिनिधि दीपक पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने फसल क्षति के मुआवजे के साथ साथ बाढ़ पीड़ित परिवारों को 10-10 हजार रूपये तथा एक- एक क्विंटल सूखा राशन सरकार से उपलब्ध कराने की मांग किया है।

वहीं सैकड़ों
किसानों का कहना है कि धान की खेती में उन्होंने भारी लागत लगाई थी। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन बाढ़ के पानी ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई गांवों में खेत पूरी तरह जलमग्न हैं, जिससे फसलों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है।

ग्रामीणों और किसान संगठनों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर शीघ्र फसल क्षति का आकलन कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सरकार जल्द से जल्द विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सके।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भी राहत की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों ने सरकार से प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को 10 हजार रुपये नकद सहायता देने तथा 1 क्विंटल खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। मांग में चावल, गेहूं, दाल एवं आवश्यक खाद्य सामग्री शामिल है ताकि विस्थापित और प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई गांवों में बाढ़ के कारण लोगों के सामने भोजन और रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को तत्काल राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लानी चाहिए।
किसानों और बाढ़ पीड़ितों को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र राहत और मुआवजा उपलब्ध कराएगी, जिससे वे इस प्राकृतिक आपदा से उबर सकें।
ब्यूरो रिपोर्ट : नरेंद्र पांडेय
वाल्मीकि एक्सप्रेस, बगहा (बिहार)
