नरेंद्र पांडेय ब्यूरो रिपोर्ट बगहा प. चंपारण बिहार……..
दहेज प्रताड़ना मामले में बगहा कोर्ट का फैसला, पति पर एक लाख और सास-ससुर पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड
बगहा। दहेज के लिए विवाहिता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने तथा आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बगहा व्यवहार न्यायालय ने पति, सास और ससुर को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्रा की अदालत ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को रामनगर थाना कांड संख्या 28/2017 और सत्रवाद संख्या 290/2017 में यह फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी पति रंजीत चौधरी को 10 वर्ष की कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा दी। वहीं, सास दयमंती देवी और ससुर मथुरा प्रसाद को भी कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया।

लोक अभियोजक जितेन्द्र भारती ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों की गवाही, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य तथ्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपितों को दोषी पाया। मामले में मृतका रीना देवी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट करने और आत्महत्या के लिए विवश करने के आरोप लगाए गए थे।
2002 में हुई थी शादी
अभियोजन के अनुसार, रामनगर थाना क्षेत्र की रीना देवी की शादी वर्ष 2002 में रंजीत चौधरी के साथ हुई थी। आरोप था कि शादी के कुछ वर्षों बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। 19 जनवरी 2017 को मायके वालों को सूचना मिली कि रीना देवी की आग में जलने से मौत हो गई है। मृतका के पिता उपेन्द्र प्रसाद ने आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री को पति, सास और ससुर ने जलाकर मार डाला। इसके बाद रामनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
पति को 10 साल की कठोर कारावास
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत पति रंजीत चौधरी को 10 वर्ष की कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। धारा 498ए के तहत उसे तीन वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया।
वहीं, सास दयमंती देवी और ससुर मथुरा प्रसाद को धारा 306 के तहत तीन-तीन वर्ष की कठोर कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 498ए के तहत तीन-तीन वर्ष का कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियों का विश्लेषण करते हुए निष्कर्ष निकाला कि मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाने में आरोपितों की भूमिका सिद्ध होती है।
