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नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद शुक्रवार शाम तक हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर/भूस्खलन से अचानक आई बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में भारी तबाही मचाई है। कई पुल, सड़कें, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे बह गए हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में मृतकों की संख्या 547 तक पहुंच गई है, जबकि 977 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अब तक 3,742 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पांच लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण राहत कार्य में काफी परेशानी हो रही है।
सबसे बड़ी चिंता नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में भूस्खलन के बाद बनी कृत्रिम/बैरियर झील को लेकर है। झील का पानी बढ़ने और ओवरफ्लो होने के बाद कुछ समय के लिए हेलीकॉप्टर से चलाया जा रहा बचाव अभियान भी रोका गया था। स्थिति का आकलन करने के बाद राहत एवं बचाव कार्य फिर शुरू कर दिया गया है।

अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
🇮🇳 बिहार में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। नेपाल में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी के जलस्तर को लेकर पश्चिम चंपारण समेत गंडक से जुड़े जिलों को अलर्ट पर रखा गया है। हालांकि फिलहाल वाल्मीकिनगर गंडक बैराज और बिहार में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है तथा गंडक का जलस्तर घटने लगा है। ताजा उपलब्ध जलस्तर आंकड़ों में बगहा और त्रिवेणी समेत कई स्थानों पर स्थिति निगरानी में है।
प्रशासन की ओर से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत गंडक नदी से जुड़े क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश हैं।
⚠️ नेपाल में स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। झील और नदियों के जलस्तर में अचानक बदलाव की आशंका के कारण बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी अगले कुछ समय तक विशेष सतर्कता जरूरी है।
